ग्रंथसार
सतर्कता केवल एक गुण नहीं, अपितु एक राजा के चरित्र की वह अग्नि है जो उसके राज्य के साथ-साथ उसकी आत्मा की भी रक्षा करती है।
शान्तिपर्व · अध्याय 46
सतर्कता का गुण