ग्रंथसार
नयी सुबह की किरणों में भीष्म पितामह के उपदेशों का सार गूँज रहा था, जहाँ एक राजा के व्यक्तित्व का निर्माण ही राष्ट्र का भविष्य गढ़ता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 56
राजा के व्यक्तिगत गुण