ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में सूतजी ने जब मौन तोड़ा, तो देवरात के अंतर्मन में ज्ञान का एक नया प्रकाश फैल गया।
शान्तिपर्व · अध्याय 69
राजा का व्यक्तिगत आचरण