ग्रंथसार
नर्मदा के पावन तट पर स्थित सूतजी के आश्रम में आज भी ज्ञान की वही चिरंतन धारा प्रवाहित हो रही है, जो युगों से शिष्यों की जिज्ञासाओं का शमन करती आई है।
शान्तिपर्व · अध्याय 81
आपद्धर्म का स्वरूप