ग्रंथसार
न्याय केवल कानून का शासन नहीं, अपितु समाज की आत्मा का प्रतिबिम्ब है, जिसे पितामह भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाकर युगों के लिए मार्ग प्रशस्त किया था।
शान्तिपर्व · अध्याय 83
न्याय का महत्त्व