ग्रंथसार
मित्रता का अर्थ केवल सुख बांटना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के उत्कर्ष और धर्म की रक्षा के लिए सत्य का आईना बनना है।
शान्तिपर्व · अध्याय 98
मित्रता की कसौटी