ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस राख और आंसुओं में छिपी सत्य की गूँज आज भी इतिहास के पन्नों को नम कर देती है।
स्त्रीपर्व · अध्याय 19
सामूहिक क्रंदन