ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में सिमटा हुआ वह विलाप, आज भी धर्म की जटिलताओं और संसार की नश्वरता का मौन साक्ष्य बनकर गूँजता है।
स्त्रीपर्व · अध्याय 2
गांधारी का आक्रंद