ग्रंथसार
महाभारत के महायुद्ध के पश्चात कुरुक्षेत्र की उस वीरान रणभूमि में शेष बची मौन चीखें, आज भी इतिहास के पन्नों में करुणा का ज्वार बनकर उभरती हैं।
स्त्रीपर्व · अध्याय 22
विधवाओं का क्रंदन