ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दफन वह करुण गाथा, आज भी मानवता को अपनी भूलों पर सोचने के लिए विवश कर देती है।
स्त्रीपर्व · अध्याय 3
आंसुओं की सरिता