ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि से उठती हुई चिताओं की वे लपटें आज भी मानवता को जीवन की नश्वरता का बोध कराती हैं।
स्त्रीपर्व · अध्याय 4
अंत्येष्टि की तैयारी