ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस श्मशान की राख में दबे उन अनकहे आंसुओं की गाथा आज भी मानवता के हृदय को द्रवित कर देती है।
स्त्रीपर्व · अध्याय 9
दुःख की सरिताएँ