ग्रंथसार
सूतजी की अमृतमयी वाणी से आज हम धर्मराज युधिष्ठिर की उस अंतिम यात्रा के साक्षी बनेंगे, जहाँ माया का अंत और दिव्यता का उदय होता है।
स्वर्गारोहणपर्व · अध्याय 3
शुद्धि और दिव्य रूपांतरण