ग्रंथसार
नयमीशारण्य की पावन भूमि पर जब संध्या की वेला ने अपने रंग बिखेरे, तो इतिहास के उस महासंग्राम की आहटें गुरुवर सूतजी की वाणी से पुनः जीवित हो उठीं।
उद्योगपर्व · अध्याय 100
महायुद्ध की व्यापक तैयारी