ग्रंथसार
क्या विवशता और मोह का मिलन ही विनाश की आधारशिला बनता है? आइए, आज सूतजी के मुख से हस्तिनापुर के उस अंधकारमय रात्रि की गाथा सुनते हैं।
उद्योगपर्व · अध्याय 101
धृतराष्ट्र की चिंता