ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजने से पूर्व की वह रात, जहाँ नियति स्वयं अपने ही हाथों से इतिहास का पन्ना पलटने की प्रतीक्षा कर रही थी।
उद्योगपर्व · अध्याय 104
सेनाओं का प्रस्थान और व्यूह रचना