ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस धधकती रणभेरी के पीछे छिपी तैयारियों और मानवीय भावनाओं की गाथा आज भी हमारे अस्तित्व को झकझोर देती है।
उद्योगपर्व · अध्याय 108
अंतिम सैन्य तैयारी