ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस महासंग्राम की आहट मात्र से आज भी हृदय में वैराग्य और शौर्य का एक साथ उदय हो जाता है।
उद्योगपर्व · अध्याय 111
सैन्य व्यूह रचनाएं और गमन