ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस विशाल रणक्षेत्र में जब सेनाओं ने अपने व्यूह रचे, तो मानो नियति ने स्वयं धर्म के अधर्म पर विजय की पटकथा लिख दी थी।
उद्योगपर्व · अध्याय 114
सैन्य व्यूह रचना