ग्रंथसार
क्या शांति के अंतिम द्वार पर भी अहंकार की दीवार इतनी ऊंची हो सकती है कि वह नियति के निर्णय को ही बदल दे?
उद्योगपर्व · अध्याय 116
शांति वार्ता की अंतिम असफलता