ग्रंथसार
संजय की दृष्टि केवल घटनाओं का विवरण मात्र नहीं थी, बल्कि वह एक जलते हुए भविष्य का प्रत्यक्ष साक्षात्कार था।
उद्योगपर्व · अध्याय 119
संजय की ज्ञानपूर्ण चेष्टा