ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भयानक सन्नाटे की गूँज आज भी इतिहास की गहराइयों में सुनाई देती है, जहाँ धर्म और अधर्म का निर्णय होना शेष था।
उद्योगपर्व · अध्याय 120
संघर्ष की अंतिम तैयारी