ग्रंथसार
क्या धृतराष्ट्र का पुत्र-मोह मात्र एक विवशता थी, या फिर वह विवेक पर पड़ा एक ऐसा पर्दा था जिसने महाविनाश को निमंत्रित किया?
उद्योगपर्व · अध्याय 125
धृतराष्ट्र का अंतर्द्वंद