ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस महान महासमर की आहट मात्र से आज भी दसों दिशाएँ सिहर उठती हैं, देवरात!
उद्योगपर्व · अध्याय 135
महायुद्ध की व्यापक तैयारियाँ