ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में समाया वह इतिहास, आज भी धर्म और अधर्म के द्वंद्व की गाथा सुनाता है।
उद्योगपर्व · अध्याय 140
कुरुक्षेत्र की ओर प्रस्थान