ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंधकारमय रात्रि के सन्नाटे में, जहाँ केवल शस्त्रों की खनक और अपनों को खोने का भय गूंज रहा था, धर्म का दीपक कैसे जला, आइए आज इसी वृत्तांत को जानते हैं।
उद्योगपर्व · अध्याय 143
विचलित मन और संशय