ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस रणभूमि में जहाँ धर्म और अधर्म का महासंग्राम होने वाला था, वहाँ केवल शंखों की गूँज नहीं, बल्कि नियति का मौन संदेश छिपा था।
उद्योगपर्व · अध्याय 158
सेनाओं का व्यूह विन्यास