ग्रंथसार
नियति की डोर कितनी विचित्र है, जहाँ सत्य का ज्ञान भी मनुष्य को अधर्म के मार्ग से डिगा नहीं पाता!
उद्योगपर्व · अध्याय 16
कर्ण का परामर्श और हठ