ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस अंतिम रात का सन्नाटा आज भी इतिहास के पन्नों में विनाश की गूँज बनकर सुनाई देता है।
उद्योगपर्व · अध्याय 160
अंतिम पूर्व-तैयारी