ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब काल का चक्र अपनी धुरी पर घूमा, तब धर्म और अधर्म का वह महासंग्राम आज भी हमारी आत्मा को झकझोर देता है।
उद्योगपर्व · अध्याय 165
सैन्य व्यूह रचना