ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी केवल युद्ध का आरंभ नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के मध्य उस शाश्वत संघर्ष की प्रतिध्वनि थी, जिसने युगों-युगों तक मानव चेतना को झकझोर दिया।
उद्योगपर्व · अध्याय 168
महायुद्ध का प्रथम शंखनाद