ग्रंथसार
क्या मोह के अंधेपन में विवेक का दीपक बुझ जाता है, या नियति की रेखा को मिटाने का सामर्थ्य किसी में नहीं है?
उद्योगपर्व · अध्याय 17
विदुर का नीतिपूर्ण उपदेश