ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजते ही नियति ने अपना वह चक्र घुमाया, जिसने इतिहास को रक्त से लिख दिया।
उद्योगपर्व · अध्याय 181
सात अक्षौहिणी सेना का प्रयाण