ग्रंथसार
महाभारत के महासमर की विभीषिका केवल शस्त्रों के चलने से नहीं, अपितु उन वृद्धों के हृदय में मची उथल-पुथल से भी परिभाषित होती है जो धर्म और कर्तव्य के बीच असहाय खड़े थे।
उद्योगपर्व · अध्याय 183
वृद्धों की व्यथा और संशय