ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम भोर की कथा मानो आज भी हवाओं में गूँजती है, जहाँ धर्म और अधर्म का महासंग्राम अपने चरम पर था।
उद्योगपर्व · अध्याय 184
महायुद्ध की अंतिम तैयारी