ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी का वह ध्वनि-नाद आज भी काल के प्रवाह में गूँज रहा है, जहाँ धर्म और अधर्म का महासंग्राम युगों की दिशा बदलने आया था।
उद्योगपर्व · अध्याय 188
महायुद्ध का उद्घोष