ग्रंथसार
सत्य के उस प्रखर स्वर की गूँज आज भी हस्तिनापुर के भग्नावशेषों में सुनाई देती है, जिसे विदुरजी ने महाराज धृतराष्ट्र के सम्मुख रखा था।
उद्योगपर्व · अध्याय 29
विदुर का हितोपदेश