ग्रंथसार
सूतजी के मुख से महाभारत के उन भयावह क्षणों की गूँज आज भी हस्तिनापुर की मिट्टी में दबी हुई प्रतीत होती है।
उद्योगपर्व · अध्याय 49
दुर्योधन का सैन्य संभार और राजाओं का आगमन