ग्रंथसार
क्या धर्म की रक्षा हेतु किए गए अंतिम शांति प्रयास को केवल राजनीति समझा जाए या फिर यह नियति का वह द्वार था, जहाँ से विनाश और निर्माण का मार्ग अलग-अलग होने वाला था?
उद्योगपर्व · अध्याय 50
श्रीकृष्ण की शांति दूत बनने की तैयारी