ग्रंथसार
नयी ऋतु के आगमन पर तपोवन में बैठे सूतजी ने जब श्रीकृष्ण के उस परम विराट रूप की गाथा छेड़नी आरम्भ की, तो देवरात के रोम-रोम में एक अद्भुत सिहरन दौड़ गई।
उद्योगपर्व · अध्याय 56
दुर्योधन का षड्यंत्र और विराट रूप