ग्रंथसार
नयी ऋतु के आगमन सा वह हस्तिनापुर का मार्ग था, जहाँ प्रभु के पग पड़ते ही नियति ने अपनी करवट बदलनी शुरू कर दी थी।
उद्योगपर्व · अध्याय 6
हस्तिनापुर में भव्य स्वागत