ग्रंथसार
अहंकार के अंधकार में जब विवेक लुप्त हो जाता है, तब नियति भी मौन होकर विनाश का मार्ग प्रशस्त करती है।
उद्योगपर्व · अध्याय 61
दुर्योधन की सैन्य-संधि