ग्रंथसार
धर्म के मार्ग पर चलने का अर्थ केवल विजय पाना नहीं, बल्कि स्वयं की आत्मा की शुद्धि और मर्यादाओं की रक्षा करना है।
उद्योगपर्व · अध्याय 82
पांडवों की युद्ध तैयारियां