ग्रंथसार
नय और नीति के इस अद्भुत संगम में जब भारतवर्ष का कण-कण रणभेरी की गूंज से थर्रा उठा था, तब की एक मार्मिक गाथा सुनो।
उद्योगपर्व · अध्याय 83
दूतों का प्रेषण और गठबंधन