ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि दानवीर कर्ण के हृदय में उस रणभूमि के ठीक पहले कैसा द्वंद्व रहा होगा, जहाँ धर्म और मित्रता एक-दूसरे के विपरीत खड़े थे?
उद्योगपर्व · अध्याय 87
कर्ण का अंतरद्वंद्व