ग्रंथसार
ऋष्यशृंग के अंग देश में कदम रखते ही आकाश से जल की मूसलाधार वर्षा कैसे होने लगी?
वनपर्व · अध्याय 114
ऋष्यशृंग का अंग देश गमन, अनावृष्टि की समाप्ति और शांता से विवाह