ग्रंथसार
धर्मराज युधिष्ठिर की दुर्दशा देखकर बलराम का हृदय व्यथा और क्रोध से भर उठा—क्या धर्म के पथ पर चलने का यही फल है?
वनपर्व · अध्याय 120
बलराम का रोष और धर्म की विडंबना