ग्रंथसार
जब क्रुद्ध देवराज इन्द्र ने च्यवन पर वज्र का प्रहार करना चाहा, तब मुनि के तपोबल ने इन्द्र की भुजा को हवा में ही जड़वत कर दिया।
वनपर्व · अध्याय 122
इन्द्र का कोप और च्यवन द्वारा उनकी भुजा का स्तम्भन