ग्रंथसार
पुत्रशोक में व्याकुल भारद्वाज ने रैभ्य को शाप देकर अग्नि-प्रवेश किया और अनजाने में नियति ने उस शाप को सत्य कर दिखाया।
वनपर्व · अध्याय 138
भारद्वाज का शाप और रैभ्य का वध