ग्रंथसार
उत्तर दिशा से बहकर आई एक दिव्य सुगन्ध ने द्रौपदी के मन में उस अनुपम सहस्रदल कमल को पाने की तीव्र लालसा जगा दी।
वनपर्व · अध्याय 142
दिव्य सौगन्धिक कमल का आगमन